एसडीएफ न्यूज ब्यूरो,खगड़िया
वैसे तो जमीन खरीद-बिक्री के नाम पर ऐसा-ऐसा फर्जीवाड़ा हुआ है,जिसकी भनक धीरे-धीरे उप मुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा तक पहुंच रही है और संभावना व्यक्त की जा रही है कि,फर्जीवाड़े की भारी हो चुकी पोटली को खोलने के लिए वह स्वयं ही खगड़िया में कैंप ना करने लगे और अपनी बेबाक भाषा से चतुर चालक सीओ सहित अन्य को नापने में ना लग जाएं,लेकिन इससे पहले खगड़िया में एक जमीन प्रकरण ने पूरे इलाके में हलचल मचा दी है।
सन्हौली के लगभग अस्सी वर्षीय एक तथाकथित जमींदार “सुरो” पर आरोप हैं कि उन्होंने अपने “विवेक यानी बुद्धि” और कुछ कथित बिचौलियों की मदद से ऐसे-ऐसे जमीन के सौदे किए और बेचा, जो पूरी तरह से गलत है।
सरकारी दस्तावेज़ों में फेरबदल कर लेन-देन को अंजाम दिया गया,जबकि अधिकांश भूमि रिकॉर्ड डिजिटल प्रणाली में दर्ज हैं।अंचल कार्यालय द्वारा जारी आदेश में दिखाया गया है कि आवेदन प्राप्त हुआ,सार्वजनिक सूचना जारी हुई, किसी ने आपत्ति नहीं की और नामांतरण स्वीकृत किया गया।लेकिन,यहां पर गौर करने वाली बात ये है राजस्व पदाधिकारी (RO)कभी भी प्रभाव या लक्ष्मीनारायण के आगे झुके नहीं और बार- बार अपने द्वारा दिए गए रिपोर्ट में जमीन के विवरण को स्पष्ट नहीं मानते रहे और अभिलेखीय व स्थलीय जांच कर पुनः प्रतिवेदन देने की बात कहते रहे।
बावजूद इसके अंचलाधिकारी (CO) की रिपोर्ट में उसी अभिलेख और जांच-प्रतिवेदन के आधार पर नामांतरण स्वीकृति दे दी गई।यह साफ तौर पर प्रक्रिया के उल्लंघन और अभिलेखों में अनियमितता को दर्शाता है।
हालांकि यहां पर ये भी गौर करना होगा कि,तत्कालीन सीओ ने प्रभाव या लक्ष्मीनारायण के आगे भले ही कुछ पंक्तियों में भू-माफियाओं के आगे घुटना टेका,लेकिन यह लिखकर अपनी गर्दन को बचाने की भरपूर कोशिश की है कि,यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि, यदि किसी प्रकार के स्वत्व वाद का मामला सामने आता है या ये पता चले कि,प्रश्नगत भूमि सरकार की है,तो आवेदक का दावा शून्य हो जाएगा।
कुल मिलाकर कह सकते हैं कि, राजस्व कर्मचारी और भू- माफियाओं ने सीओ के गर्दन को बुरी तरह से फंसा दिया है।
अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि,
अब उन परिवारों का क्या होगा, जिन्होंने अपनी गाढ़ी कमाई से जमीन खरीदी?बताया जा रहा है कि इलाके में जमीन की कीमत लगभग 65 से 70 लाख रुपये प्रति कट्ठा किया गया है और कई कट्ठों का लेन-देन किया गया। यह पूरी तरह से गलत और कानून के खिलाफ है।
अहम सवाल यह है कि खरीदारों की भरपाई करेगा कौन?
बिचौलिये, सौदा कराने वाले लोग या वही व्यक्ति जिसने जमीन को गलत तरीके से बेचा, इन दस्तावेज़ों को देखने के बाद जब हमारी टीम की बातचीत एक रिटायर्ड कर्मचारी से हुई, तो उन्होंने भी दांतों तले उंगली दबाई और कहा, “ऐसा कैसे कर दिया गया! यह तो ज्ञात अपराध है।”

एसडीएफ न्यूज ब्यूरो,खगड़िया













