एसडीएफ न्यूज ब्यूरो,खगड़िया
खगड़िया नगर परिषद में महाघोटाले का आरोप! 39 में से 24 वार्ड पार्षदों का विद्रोह, सभापति–उपसभापति कटघरे में खगड़िया नगर परिषद में सत्ता की कुर्सी हिल चुकी है।यह जानकर हर कोई एक दूसरे से सवाल कर रहा है।
लेकिन,भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी और मनमानी शासन के आरोपों के बीच अब 39 में से 24 वार्ड पार्षदों ने खुला विद्रोह कर दिया है।वार्ड पार्षद शिवराज यादव के नेतृत्व में अधिसंख्य पार्षदों ने सीधे तौर पर नगर सभापति और उपसभापति के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।नगर कार्यपालक पदाधिकारी को लिखे गए पत्र में पार्षदों ने साफ कहा है कि नगर परिषद को निजी जागीर की तरह चलाया जा रहा है,कानून को ताक पर रखकर बोर्ड की बैठकें महीनों से नहीं हो रही हैं और विकास नहीं बल्कि सिर्फ कमीशन की राजनीति चलाई जा रही है।
बिहार नगरपालिका अधिनियम2007 की धारा 48 के अनुसार हर महीने बोर्ड की बैठक अनिवार्य है,लेकिन खगड़िया में कभी तीन महीने तो कभी छह महीने बाद बैठक होती है।इस मनमानी का सीधा असर यह है कि विकास कार्य पूरी तरह ठप हैं,शहर बदहाल है और जनता बेहाल है।पार्षदों का गंभीर आरोप है कि बोर्ड में जो प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास होते हैं,उन्हें बाद में बदल दिया जाता है,नए एजेंडे जोड़ दिए जाते हैं और वही प्रस्ताव रिकॉर्ड में चढ़ाए जाते हैं,जिनमें मोटी कमीशन सेट होती है यानी मीटिंग कुछ और होती है और रिकॉर्ड कुछ और तैयार किया जाता है।
सफाई के नाम पर करोड़ों की खरीद को लेकर भी बड़ा सवाल खड़ा किया गया है।सैकड़ों हाथ ठेले,डस्टबिन,मैजिक गाड़ियां, नए ट्रैक्टर और ट्रिपर खरीदे गए जबकि सच्चाई यह है कि 34 वार्डों की सफाई एनजीओ के जिम्मे है और नगर परिषद खुद सिर्फ 5 वार्डों में सफाई कराती है।
ऐसे में सवाल सीधा है कि बाकी सामान आखिर क्यों खरीदा गया और किसकी जेब भरने के लिए यह खरीद हुई।पार्षदों ने आरोप लगाया है कि जहां कमीशन दिखता है वहीं खरीद होती है और जनता से जुड़े कामों को जानबूझकर दबाया जाता है।गरीबों से जुड़ी योजनाएं पूरी तरह ठप हैं।प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीबों के घर नहीं बन रहे हैं।कबीर अंत्येष्टि योजना पिछले तीन वर्षों से बंद पड़ी है जिसके कारण गरीबों को अंतिम संस्कार तक में परेशानीहो रही है। शहर में जलजमाव, सड़क और नाले की हालत बद से बदतर है लेकिन इन पर कोई ठोस काम नहीं हो रहा। पार्षदों ने मांग की है कि सभी प्रस्तावों पर पार्षदों के हस्ताक्षर अनिवार्य किए जाएं, सभी खरीद और खर्चों की पारदर्शी जांच हो, पचास हजार से ऊपर के हर खर्च पर बोर्ड की स्वीकृति अनिवार्य हो और शहर के सभी जलजमाव वाले क्षेत्रों में सड़क सह नाला निर्माण कराया जाए। इन सभी मुद्दों को लेकर पार्षदों ने 10 दिसंबर 2025 को दिन के 1 बजे विशेष बोर्ड बैठक बुलाने की मांग की है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या नगर सभापति और उपसभापति इन गंभीर आरोपों का जवाब देंगे, क्या करोड़ों की खरीद और कथित घोटालों की जांच होगी या फिर यह मामला भी पहले की तरह फाइलों में दबा दिया जाएगा। खगड़िया की जनता अब जवाब चाहती है कि विकास के नाम पर लूट आखिर कब तक चलती रहेगी??

खगड़िया नगर परिषद में महाघोटाले का आरोप! 39 में से 24 वार्ड पार्षदों का विद्रोह, सभापति–उपसभापति कटघरे में खगड़िया नगर परिषद में सत्ता की कुर्सी हिल चुकी है।यह जानकर हर कोई एक दूसरे से सवाल कर रहा है।
लेकिन,भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी और मनमानी शासन के आरोपों के बीच अब 39 में से 24 वार्ड पार्षदों ने खुला विद्रोह कर दिया है।वार्ड पार्षद शिवराज यादव के नेतृत्व में अधिसंख्य पार्षदों ने सीधे तौर पर नगर सभापति और उपसभापति के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।नगर कार्यपालक पदाधिकारी को लिखे गए पत्र में पार्षदों ने साफ कहा है कि नगर परिषद को निजी जागीर की तरह चलाया जा रहा है,कानून को ताक पर रखकर बोर्ड की बैठकें महीनों से नहीं हो रही हैं और विकास नहीं बल्कि सिर्फ कमीशन की राजनीति चलाई जा रही है।
सफाई के नाम पर करोड़ों की खरीद को लेकर भी बड़ा सवाल खड़ा किया गया है।सैकड़ों हाथ ठेले,डस्टबिन,मैजिक गाड़ियां, नए ट्रैक्टर और ट्रिपर खरीदे गए जबकि सच्चाई यह है कि 34 वार्डों की सफाई एनजीओ के जिम्मे है और नगर परिषद खुद सिर्फ 5 वार्डों में सफाई कराती है।













