एसडीएफ न्यूज ब्यूरो,खगड़िया
खगड़िया जिले में हाल ही में दर्ज दो अलग–अलग प्राथमिकी (FIR) अब कानून-व्यवस्था से ज़्यादा प्रशासनिक निष्पक्षता और राजनीतिक निषेध का मुद्दा बनती जा रही हैं। इन मामलों में कई सामाजिक और राजनीतिक रूप से सक्रिय व्यक्तियों के नाम शामिल किए जाने के बाद जिले की राजनीति गरमा गई है और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
नगर परिषद खगड़िया के नगर सभापति प्रतिनिधि ज्योतिष मिश्रा, जिला परिषद सदस्य रजनीकांत कुमार, भाजपा जिला प्रवक्ता मनीष चौधरी तथा भाजपा नेता रविशंकर कुमार सहित कई अन्य नागरिकों के नाम एफआईआर में दर्ज किए गए हैं। परिजनों और समर्थकों का आरोप है कि बिना किसी ठोस साक्ष्य, प्रत्यक्ष भूमिका या व्यक्तिगत जांच के सामूहिक रूप से नामजदगी कर दी गई।
सोशल मीडिया पोस्ट बना विवाद का कारण?
ज्योतिष मिश्रा के मामले में परिजनों का कहना है कि उन्होंने घटना के बाद सोशल मीडिया पर जो पोस्ट साझा की, वह पूरी तरह संयमित थी। न तो उसमें पीड़िता की पहचान उजागर की गई, न ही कोई आपत्तिजनक टिप्पणी की गई। उलटे, पोस्ट में पुलिस प्रशासन की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए आरोपी की शीघ्र गिरफ्तारी को सराहनीय बताया गया था।इसके बावजूद उनका नाम प्राथमिकी में शामिल होना यह सवाल खड़ा करता है कि क्या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भी अब जांच के दायरे में आ गई है।
CCTV और लोकेशन के बावजूद नामजदगी पर सवाल
जिला परिषद सदस्य रजनीकांत कुमार के परिजनों का दावा है कि समाहरणालय परिसर में हुए हंगामा-उपद्रव के समय वे घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे। बल्कि अपर पुलिस अधीक्षक और गंगौर थाना प्रभारी के अनुरोध पर वे पीड़िता की माता के साथ गंगौर थाना परिसर में मौजूद थे। इस दावे के समर्थन में थाना परिसर के सीसीटीवी फुटेज और संबंधित अधिकारियों के बयान उपलब्ध होने की बात कही जा रही है। इसके बावजूद चित्रगुप्त नगर थाना कांड में उनका नाम दर्ज किया जाना पुलिस जांच पर सवाल खड़े करता है।बिना साक्ष्य, बिना प्रत्यक्षदर्शी?
भाजपा जिला प्रवक्ता मनीष चौधरी के संबंध में परिजनों का कहना है कि घटना के समय वे खगड़िया मेन रोड स्थित एक पारिवारिक अंतिम संस्कार में शामिल थे और बाद में अपने पैतृक गांव रहिमपुर में पंचायत स्तर की बैठक में मौजूद थे। उनका आरोप है कि न तो कोई प्रत्यक्षदर्शी है, न कोई वीडियो या अन्य भौतिक साक्ष्य, इसके बावजूद उनका नाम प्राथमिकी में जोड़ दिया गया।पटना में मौजूद होने का दावा, फिर भी FIR में नाम
सबसे अहम दावा भाजपा नेता रविशंकर कुमार को लेकर सामने आया है। समर्थकों का कहना है कि घटना के दिन वे पटना स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में माननीय उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ उपस्थित थे। इस उपस्थिति के प्रमाण पार्टी कार्यालय के रिकॉर्ड और गवाहों से मिलने की बात कही जा रही है। इसके बावजूद उनका नाम एफआईआर में शामिल होना, जांच की गंभीरता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।सिर्फ बड़े नाम नहीं, आम लोग भी चपेट में
स्थानीय लोगों का कहना है कि दोनों एफआईआर में केवल राजनीतिक हस्तियों के नाम ही नहीं, बल्कि कई सामाजिक कार्यकर्ता और सामान्य नागरिक भी शामिल हैं, जिनकी कथित रूप से घटनाओं में कोई भूमिका नहीं थी। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि कहीं भीड़ के दबाव या राजनीतिक प्रभाव में आकर सामूहिक नामजदगी तो नहीं की गई।परिजनों और समर्थकों ने पुलिस प्रशासन से दोनों मामलों की निष्पक्ष, तथ्यपरक और व्यक्ति-आधारित जांच की मांग की है। उनका कहना है कि निर्दोष लोगों के नाम कांड से हटाए जाएँ ताकि आम जनता का कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन पर विश्वास बना रहे।
फिलहाल इन मामलों पर पुलिस प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन खगड़िया की राजनीति और सामाजिक हलकों में यह मुद्दा लगातार चर्चा और बहस का विषय बना हुआ है।
















