एसडीएफ न्यूज ब्यूरो ,खगड़िया
बिहार के खगड़िया से एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है, जहां जिला समाहरणालय का एक कर्मचारी सालों से मौत का सामान बेच रहा था — और वो भी सरकारी कुर्सी पर बैठकर। STF पूर्णिया की टीम ने सोमवार देर शाम खगड़िया कलेक्ट्रेट कार्यालय के बाहर से जिला सामान्य शाखा के कंप्यूटर ऑपरेटर अविनाश कुमार को गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि वह मृतक आर्म्स लाइसेंसधारियों के ऑरिजनल दस्तावेज़ तस्करों को महज ₹5,000 में बेच देता था। ये तस्कर उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर सरकारी गोदामों से कारतूस का उठाव करते और फिर इन्हें राज्यभर में अपराधियों तक पहुंचाया जाता था।
STF की जांच में खुलासा हुआ है कि बीते एक साल में खगड़िया जिले के 6 मृतक लाइसेंसधारियों के नाम पर कई जिलों से गोलियां उठाई गईं। लेकिन जब सत्यापन किया गया, तो पता चला कि जिन लोगों के नाम पर कारतूस निकाली गईं, वे सालों पहले मर चुके थे। इतना ही नहीं, उन मृतकों के ऑरिजनल दस्तावेज जिला सामान्य शाखा से गायब मिले।
STF को इस पूरे रैकेट का सुराग तब मिला, जब मानसी (खगड़िया) निवासी कुख्यात तस्कर सोना बाबू गुप्ता को हाजीपुर से गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में उसने कबूल किया कि सरकारी दफ्तर से ही उसे दस्तावेज मुहैया कराए जाते थे।
इस खुलासे के बाद बिहार पुलिस और STF की संयुक्त टीम ने कलेक्ट्रेट कर्मी अविनाश को गिरफ्तार कर लिया, जबकि अन्य कर्मियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। इस बीच, जिला सामान्य शाखा के प्रभारी तेज नारायण सिंह ने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं थी और अब वे खुद इसकी जांच करेंगे।
सवाल बड़ा है — अगर सरकारी दफ्तर से ही तस्करों को दस्तावेज मिल रहे हैं, तो क्या अब जनता सरकारी मोहर पर भी भरोसा करे? और क्या सिस्टम के भीतर छिपे ये बारूद के सौदागर बेनकाब हो पाएंगे?
















