एसडीएफ न्यूज ब्यूरो,खगड़िया
खगड़िया के कृष्णापुरी बलुआही स्थित राष्ट्रीय जनता दल (राजद) जिला कार्यालय में शनिवार, 24 जनवरी को सामाजिक न्याय के प्रणेता, जननायक कर्पूरी ठाकुर की 102वीं जयंती श्रद्धा, उत्साह और गरिमा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर राजद जिलाध्यक्ष मनोहर यादव और पूर्व विधायक डॉ. संजीव की मौजूदगी में सैकड़ों राजद पदाधिकारी, कार्यकर्ता और समर्थक एकत्रित हुए।
कार्यक्रम की शुरुआत कर्पूरी ठाकुर के चित्र पर पुष्प अर्पित कर एवं माल्यार्पण कर की गई। इसके बाद राजद कार्यकर्ताओं ने जुलूस निकाला, जो राजद कार्यालय से एनएच-31 और एमजी मार्ग होते हुए जेएनकेटी इंटर विद्यालय पहुंचा। वहां स्थापित जननायक कर्पूरी ठाकुर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। जुलूस के दौरान कार्यकर्ताओं ने कर्पूरी ठाकुर अमर रहें और सामाजिक न्याय के नारों से वातावरण को गुंजायमान कर दिया।
जयंती समारोह की अध्यक्षता राजद जिलाध्यक्ष मनोहर यादव ने की, जबकि संचालन जिला प्रधान महासचिव नंदलाल मंडल ने किया।
इस मौके पर मनोहर यादव ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की विचारधारा के प्रतीक थे।
उन्होंने पिछड़े वर्गों को आरक्षण देकर समाज में बराबरी का अधिकार दिलाया। उनका यह निर्णय उस समय का सबसे साहसिक और ऐतिहासिक कदम था, जिसने बिहार ही नहीं बल्कि पूरे देश की राजनीति की दिशा बदल दी।
पूर्व विधायक डॉ. संजीव ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर ने शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार किए। शिक्षा मंत्री रहते हुए उन्होंने आठवीं कक्षा तक की पढ़ाई मुफ्त कर दी, ताकि गरीब परिवारों के बच्चे भी शिक्षा से वंचित न रहें। उन्होंने उर्दू को द्वितीय राजभाषा का दर्जा दिलाया और पांच एकड़ तक की जमीन पर मालगुजारी समाप्त की।
वक्ताओं ने कर्पूरी ठाकुर के सादगीपूर्ण जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवन में कभी कोई संपत्ति नहीं बनाई। दो बार मुख्यमंत्री और एक बार उपमुख्यमंत्री रहने के बावजूद वे हमेशा आम लोगों की तरह सादा जीवन जीते रहे। उनका पूरा जीवन वंचित, पिछड़े और गरीब वर्ग के उत्थान के लिए समर्पित रहा।
कार्यक्रम में मौजूद नेताओं ने कर्पूरी ठाकुर के बचपन के संघर्षों का भी जिक्र किया और बताया कि किस प्रकार उन्होंने सामाजिक बाधाओं के बावजूद खलिहान में बैठकर शिक्षा ग्रहण की और आगे चलकर बिहार की राजनीति में एक बड़ा स्थान हासिल किया।वक्ताओं ने कहा कि 1978 में आरक्षण लागू कर कर्पूरी ठाकुर ने सामाजिक न्याय का नया अध्याय लिखा। उन्होंने अंग्रेजी की अनिवार्यता को समाप्त कर हिंदी को बढ़ावा दिया और शिक्षा को समाज परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यम बताया।
इस अवसर पर जिला उपाध्यक्ष कैलाशचंद्र यादव, प्रमोद यादव, युवा जिलाध्यक्ष उदय यादव, डॉ. संजय कुमार मांझी, रणवीर कुमार, सुनील चौरसिया, बिनोद कुमार, अजीत सरकार, सुबोध यादव, बेबी रानी, रंजू सहनी, राजकिशोर राज, विजय यादव, पप्पू यादव सहित जिले भर से पहुंचे सैकड़ों राजद कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में सभी ने जननायक कर्पूरी ठाकुर के आदर्शों पर चलने और उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।


















