राजेश सिन्हा की रिपोर्ट
एसडीएफ न्यूज ब्यूरो,खगड़िया
मछली और दुग्ध उत्पादन के लिए जाना जाने वाला खगड़िया जिला अब दुनिया में प्रसिद्ध होने वाला है,क्योंकि खगड़िया में अब जमीन भी “बच्चा” देने लगी है,वो भी अपनी क्षमता से ज्यादा।जी हां,सुनने में अजीब लगेगा।
लेकिन,डीएवी स्कूल के समीप स्थित एक जमीन प्रकरण कुछ ऐसा ही इशारा कर रहा है।लगभग अस्सी वर्षीय एक कथित जमींदार “सुरो” पर आरोप है कि उन्होंने राजस्व कर्मचारी और कथित बिचौलियों की मदद से ऐसी जमीन के सौदे कर दिए,जिनके रिकॉर्ड खुद सरकारी दस्तावेजों में स्पष्ट नहीं हैं।
आवेदन लिया गया,सार्वजनिक सूचना जारी होने की बात दर्ज की गई,आपत्ति नहीं आने का उल्लेख किया गया और नामांतरण भी स्वीकृत कर दिया गया।लेकिन,राजस्व पदाधिकारी यानी RO ने अपनी रिपोर्ट में जमीन के विवरण को स्पष्ट नहीं माना और अभिलेखीय व स्थलीय जांच की जरूरत बताई।
इसके बावजूद अंचलाधिकारी यानी CO की रिपोर्ट में उसी आधार पर नामांतरण पास कर दिया गया।अब इस पूरे मामले की सबसे दिलचस्प बात यह है कि आखिर 8 धुर या फिर 10 धुर की ही रजिस्ट्री बार-बार क्यों हो रही है,जबकि जिस जमीन को दखल का मानकर CO ने नामांतरण स्वीकृत किया,वह कुल मिलाकर सिर्फ 10 धुर ही बताई जा रही है।सवाल उठता है कि जब आधार भूमि ही मात्र 10 धुर है तो अलग-अलग नामों से 8 धुर और 10 धुर की रजिस्ट्री कैसे संभव हो रही है, क्या एक ही छोटे टुकड़े को कई बार बेचा गया,या फिर कागजों में जमीन की “पैदावार” बढ़ा दी गई,और सबसे बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि जब आधार जमीन केवल 10 धुर बताई जा रही है तो फिर बीघा से ज्यादा जमीन आखिर बिक कैसे गई।एक बार एक कट्ठा जमीन एक साथ बेचकर जमींदार ने पूरी तरह से प्रमाणित कर दिया है कि,सिस्टम को उसने अपने में इस कदर मंत्रमुग्ध कर दिया कि,वह यह भूल गया कि…
इलाके में जमीन की कीमत 65 से 70 लाख रुपये प्रति कट्ठा बताई जा रही है, ऐसे में कई परिवारों ने अपनी गाढ़ी कमाई लगाकर यह जमीन खरीदी है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि जांच में गड़बड़ी साबित होती है तो खरीदारों की भरपाई कौन करेगा? बिचौलिये, विक्रेता या फिर सिस्टम की लापरवाही!!
बहरहाल,एक रिटायर्ड अंचलाधिकारी सहित जमीनी मामले को समझने वाले कई वरीय अधिवक्ताओं ने कहा कि,ऐसा मामला उन्होंने अपने जीवन में कम ही देखा है और यदि दस्तावेज सही हैं तो यह सीधा-सीधा गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। अब देखना यह है कि खगड़िया में “जमीन की बढ़ती पैदावार” का यह मामला किस दिशा में जाता है और लपटें उठीं तो आखिर कौन-कौन झुलसेगा?
क्रमशः
















