एसडीएफ न्यूज ब्यूरो, खगड़िया
खगड़िया में इन दिनों सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या जनता के टैक्स की गाढ़ी कमाई से खेल हुआ है, या फिर सब कुछ नियमों के तहत पारदर्शी तरीके से हुआ? मामला जुड़ा है खगड़िया नगर परिषद द्वारा Government e-Marketplace (GeM) के माध्यम से की गई करीब 14 करोड़ 49 लाख 21 हजार 70 रुपये की खरीद से। शिकायतें पहुंचीं नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार तक, जिसके बाद विभाग ने कथित तौर पर भुगतान और कार्यादेश पर रोक लगाने का निर्देश जारी किया और पत्र नगर कार्यपालक पदाधिकारी व जिला पदाधिकारी को भेजा गया बताया जा रहा है। आरोप है कि जिन सामानों की खरीद की गई, उनकी दरें बाजार मूल्य से कई गुना अधिक हैं। उदाहरण के तौर पर 1000 डेकोरेटिव लाइट ₹35,885 प्रति पीस की दर से खरीदी गई, जबकि बाजार मूल्य लगभग ₹5,000 बताया जा रहा है। 8 डिवॉटरिंग पंप करीब ₹29.95 लाख प्रति पीस, जबकि बाजार में लगभग ₹8 लाख। 240 लीटर के 1000 डस्टबिन ₹9,965 प्रति पीस, जबकि बाजार मूल्य लगभग ₹4,000। 20 बस स्टॉप शेल्टर ₹12.85 लाख प्रति पीस, जबकि बाजार में करीब ₹3 लाख। 25 सिग्नेज बोर्ड ₹4.64 लाख प्रति पीस, जबकि बाजार मूल्य लगभग ₹5,000। वहीं ट्रक माउंटेड जेटिंग मशीन ₹2.94 करोड़ में खरीदी गई, जबकि बाजार मूल्य लगभग ₹30 लाख बताया जा रहा है। आरोप लगाने वालों का दावा है कि यदि पूरा भुगतान हो जाता तो करीब 9 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च होते। टेंडर प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि टेंडर की सूचना न तो सूचना पटों पर चस्पा की गई और न ही अखबारों में व्यापक रूप से प्रकाशित की गई, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। नगर परिषद के 34 वार्डों में सफाई कार्य आउटसोर्सिंग से कराया जा रहा है, जहां शर्त के अनुसार एजेंसी को अपने उपकरण स्वयं उपलब्ध कराने थे, लेकिन परिषद द्वारा उपकरण खरीदकर एजेंसी को उपलब्ध कराए जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं। इधर नगर सभापति प्रतिनिधि ज्योतिष मिश्रा ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा है कि खरीद प्रक्रिया पूरी तरह GeM पोर्टल के माध्यम से नियमों के अनुसार हुई है और जो संवेदक सबसे कम वैध दर (L1) देता है, उसी को कार्य आवंटित किया जाता है, इसमें किसी प्रकार का व्यक्तिगत हस्तक्षेप संभव नहीं है। उनका कहना है कि निविदा में हारने वाले संवेदक द्वारा अनावश्यक आरोप लगाए जा रहे हैं। फिलहाल मामला जांच के अधीन है और विभागीय रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा कि खरीद प्रक्रिया में अनियमितता हुई है या नहीं, लेकिन खगड़िया में इस मुद्दे पर सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है।















