एसडीएफ न्यूज ब्यूरो,पटना : बिहार विधानसभा का सत्र लगातार विवादों और हंगामों की भेंट चढ़ता जा रहा है, और गुरुवार को एक बार फिर एसआईआर मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। विपक्षी विधायक काले कपड़ों में विधानसभा पहुंचे और जैसे ही कार्यवाही शुरू हुई, जोरदार शोरगुल और नारेबाजी शुरू हो गई। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सदन में जोरदार तरीके से एसआईआर का मुद्दा उठाते हुए कहा कि बिहार के किसी भी नागरिक का नाम वोटर लिस्ट से नहीं कटना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर गरीब, दलित और अल्पसंख्यक समुदायों को क्यों टारगेट किया जा रहा है। तेजस्वी यादव ने कहा कि बाबा साहब ने जो सबसे बड़ा अधिकार गरीबों को दिया, वो वोट का अधिकार था, और आज उसी पर हमला हो रहा है। उन्होंने सरकार पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि यह एक सुनियोजित साजिश है ताकि लोकतांत्रिक ताकतों को कमजोर किया जा सके। सदन में विपक्ष के तेवर देखते हुए स्पीकर नंदकिशोर यादव ने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की, लेकिन विपक्षी विधायकों का विरोध और आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा। इससे पहले बुधवार को भी सदन में भारी हंगामा हुआ था, जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नेता प्रतिपक्ष को लालू-राबड़ी राज की याद दिलाई थी, वहीं डिप्टी सीएम विजय सिन्हा और राजद विधायक भाई वीरेन्द्र के बीच तीखी नोकझोंक हो गई थी। राजद विधायक द्वारा असंसदीय शब्दों के इस्तेमाल पर स्पीकर ने कड़ी नाराजगी जाहिर की थी और खेद प्रकट करने को कहा था। इसी दौरान उन्होंने सत्ता पक्ष के मंत्रियों तक को फटकार लगाई थी। आज जबकि विधानसभा सत्र का अंतिम दिन करीब है, पूरा ध्यान इस बात पर है कि क्या सरकार एसआईआर पर विपक्ष के सवालों का जवाब देगी या ये सत्र भी सिर्फ हंगामे की भेंट चढ़ जाएगा। बिहार की राजनीति में एक बार फिर वोट के अधिकार को लेकर जंग छिड़ चुकी है और जनता पूरे घटनाक्रम पर नजरें गड़ाए बैठी है।
















