एसडीएफ न्यूज ब्यूरो, खगड़िया
खगड़िया: धमारा घाट स्टेशन पर 19 अगस्त 2013 को हुई राज्यरानी एक्सप्रेस त्रासदी में मां कात्यानी की पूजा के लिए जा रहे 28 श्रद्धालुओं की मौत को फरकियावासियों ने शहादत का दर्जा देते हुए मंगलवार को एक दिवसीय उपवास रखा। इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता विजय कुमार सिंह की अध्यक्षता और शिक्षाविद् मनीष कुमार सिंह के संचालन में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि 1981 की बागमती नदी रेल हादसा और 2013 की राज्यरानी त्रासदी दोनों ने फरकिया की आत्मा को झकझोरा है। लेकिन इन्हीं संघर्षों का परिणाम है कि आज धमारा स्टेशन पर ओवरब्रिज, प्लेटफॉर्म, सड़क-पुल का निर्माण और मां कात्यानी स्थान को पर्यटन स्थल का दर्जा मिल पाया है। समाजसेवी इंजीनियर धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि हादसे में घायल श्रद्धालुओं को प्रशासन ने नहीं बल्कि स्थानीय लोगों और नर्सिंग कॉलेज के छात्रों ने अस्पताल तक पहुंचाया था। अंतरराष्ट्रीय पत्रकार विवेक उमराव ने कहा कि विदेशों में ऐसी त्रासदी होती तो सरकार शहीद श्रद्धालुओं की याद में प्रतीक चिन्ह बनाती। रोहियार पैक्स अध्यक्ष साकेत सिंह बबलू ने नेताओं को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि गरीबी मिटाने का नारा देकर सरकारों ने गरीबों को ही मिटा दिया। श्रद्धांजलि सभा में फरकिया के सैकड़ों लोगों ने भाग लिया और सबसे पहले 28 मोमबत्तियां जलाकर श्रद्धालुओं को नमन किया।
28 श्रद्धालुओं की मौत नहीं, शहादत हुई है और व्यर्थ नहीं जाएगी : त्यागी
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि युवा शक्ति के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नागेंद्र सिंह त्यागी ने कहा कि रेल प्रशासन यात्री सुविधा के बजाय आम आदमी की जेब काटने के नए-नए नियम बनाता है। धमारा घाट स्टेशन को मॉडल स्टेशन का दर्जा जरूर दिया गया, लेकिन आज भी यह स्टेशन इमरजेंसी लाइट और असुरक्षा के माहौल में चलता है। उन्होंने कहा कि यदि फरकियावासी विकास के लिए एकजुट हो जाएं तो स्टेशन से लेकर अस्पताल तक सारी व्यवस्था सुधर जाएगी। त्यागी ने स्पष्ट कहा कि राज्यरानी त्रासदी में 28 श्रद्धालुओं की मौत नहीं बल्कि शहादत हुई है और यह शहादत कभी व्यर्थ नहीं जाएगी।

















