एसडीएफ न्यूज ब्यूरो,खगड़िया
खगड़िया की सियासत में एक नया नाम, एक नई सोच और एक नई दिशा सामने आई है— जन सुराज ने समाजसेवा की मिसाल बन चुकी जयंती पटेल को खगड़िया सीट से उम्मीदवार घोषित किया है। जयंती पटेल, जो कुर्मी समाज से आती हैं, बीते कई सालों से लोगों के बीच अपने नेक कामों की वजह से जानी जाती हैं। कोरोना काल के उस कठिन समय में जब लोग अपने घरों में बंद थे, जयंती पटेल ने बिना किसी डर के घर-घर जाकर मास्क, सैनिटाइज़र और ज़रूरी सामान पहुँचाया। जब लोग एक-दूसरे से दूर भाग रहे थे, तब उन्होंने सेवा को अपना धर्म और मानवता को अपना कर्तव्य बनाया।
गरीब बेटियों के विवाह में मदद करना, समारोहों में खुद शामिल होकर जिम्मेदारी उठाना, ठंडी रातों में बुज़ुर्गों के बीच कंबल बाँटना, भूखों को भोजन कराना यही है जयंती पटेल की पहचान। समाज के हर तबके में उनकी सादगी, ईमानदारी और सेवा भावना की चर्चा है। इन्हीं गुणों के कारण जन सुराज ने उन पर भरोसा जताया और खगड़िया से टिकट दिया।
घोषणा के वक्त जब उनका नाम लिया गया, तो उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े क्योंकि यह सिर्फ़ टिकट नहीं, समाजसेवा की लंबी यात्रा का सम्मान था। अब खगड़िया में सियासत का समीकरण बदलता दिख रहा है।
एक ओर पुराने चेहरे हैं, तो दूसरी ओर जनता की सेवा से निकली हुई नई आवाज़ — जयंती पटेल। जनता कह रही है, “जो कोरोना में साथ थी, वही अब राजनीति में भी साथ होगी।” कुर्मी समाज में उनके प्रति जो समर्थन दिख रहा है, वह बताता है कि इस बार मुकाबला सिर्फ़ दलों का नहीं, सोच का है। और यही सोच है सेवा को सियासत से ऊपर रखने की सोच। अब देखने वाली बात होगी कि क्या खगड़िया की जनता इस बदलाव को अपना कर इतिहास रचती है या नहीं। पर इतना तय है खगड़िया की हवा अब बदल रही है, और इस बदलाव के केंद्र में हैं जयंती पटेल, जिनकी सेवा अब सियासत की नई परिभाषा लिखने जा रही है।


गरीब बेटियों के विवाह में मदद करना, समारोहों में खुद शामिल होकर जिम्मेदारी उठाना, ठंडी रातों में बुज़ुर्गों के बीच कंबल बाँटना, भूखों को भोजन कराना यही है जयंती पटेल की पहचान। समाज के हर तबके में उनकी सादगी, ईमानदारी और सेवा भावना की चर्चा है। इन्हीं गुणों के कारण जन सुराज ने उन पर भरोसा जताया और खगड़िया से टिकट दिया।















