एसडीएफ न्यूज ब्यूरो,खगड़िया
मंडल कारा खगड़िया में बंदियों के मानसिक, भावनात्मक एवं वैचारिक उत्थान को केंद्र में रखते हुए “सकारात्मक सोच” विषय पर एक भव्य एवं अत्यंत प्रेरणादायक लाइफ-स्किल कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व प्रोफेसर देबज्योति मुखर्जी, अंतर्राष्ट्रीय लाइफ-स्किल ट्रेनर, ने किया, जिनकी प्रेरणादायी शैली और व्यवहारिक दृष्टिकोण ने उपस्थित सभी लोगों को गहराई से प्रभावित किया।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बंदियों के भीतर सकारात्मक दृष्टिकोण, आत्मविश्वास, धैर्य एवं आत्म-परिवर्तन की भावना को जागृत करना था। प्रोफेसर मुखर्जी ने अपने ओजस्वी वक्तव्य में यह स्पष्ट किया कि व्यक्ति की परिस्थितियाँ नहीं, बल्कि उसकी सोच उसके भविष्य का निर्माण करती है। उन्होंने वास्तविक जीवन के उदाहरणों, प्रेरक कथाओं और सरल अभ्यासों के माध्यम से बंदियों को यह समझाया कि कठिन से कठिन परिस्थिति में भी सकारात्मक सोच अपनाकर जीवन को नई दिशा दी जा सकती है।
कार्यक्रम के दौरान बंदियों को नकारात्मक भावनाओं से बाहर निकलने, स्वयं को स्वीकार करने और बेहतर भविष्य की ओर अग्रसर होने के लिए मानसिक रूप से तैयार किया गया। प्रोफेसर देबज्योति मुखर्जी ने कहा कि आत्मचिंतन, अनुशासन और सकारात्मक सोच ही किसी भी व्यक्ति को आत्मनिर्भर और सशक्त बना सकती है।
इस अवसर पर जेल अधीक्षक राधेश्याम सुमन, जेलर, कारा मंडल के अधिकारी, पुलिस बल के जवानों के साथ-साथ सभी महिला एवं पुरुष बंदियों ने सक्रिय सहभागिता की। कार्यक्रम में बंदियों ने अपने अनुभव साझा किए और सकारात्मक सोच को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का संकल्प लिया।
पूरा कार्यक्रम प्रेरणा, ऊर्जा और आत्मविश्वास से परिपूर्ण रहा। मंडल कारा खगड़िया में आयोजित यह पहल बंदियों के मानसिक पुनर्वास और सामाजिक पुनर्संयोजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुई, जिसने उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति के मन में आशा और परिवर्तन की नई रोशनी जगाई।



















