एसडीएफ न्यूज़ ब्यूरो, खगड़िया
खगड़िया जिले के गोगरी नगर परिषद क्षेत्र में अतिक्रमण हटाओ अभियान को लेकर एक बार फिर चर्चाओं का बाजार गर्म है। कुछ दिन पहले जिस सख्ती के साथ प्रशासनिक अमला सड़कों पर उतरा था, बुलडोजर गरजा था और नाले व सार्वजनिक जमीन से कब्जे हटाए गए थे, अब वही अभियान ठंडा पड़ता दिखाई दे रहा है। 6 फरवरी के बाद दोबारा कार्रवाई शुरू करने का भरोसा दिया गया था, लेकिन करीब 15 दिन बीत जाने के बाद भी न तो बुलडोजर दोबारा नजर आया और न ही किसी नई कार्रवाई की आधिकारिक घोषणा हुई।
पहले चरण में शिव मंदिर से पुल गली तक अतिक्रमण हटाया गया था। उस समय प्रशासन ने स्पष्ट कहा था कि यह कार्रवाई किसी एक गली या मोहल्ले तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे नगर परिषद क्षेत्र में चरणबद्ध तरीके से चलेगी।
नालों पर बने ढांचे, सरकारी जमीन पर खड़ी दुकानें और सार्वजनिक रास्तों पर किए गए कब्जे—सब पर समान रूप से कार्रवाई की जाएगी। लेकिन जमीनी हकीकत अब कई सवाल खड़े कर रही है।
जिन स्थानों से अतिक्रमण हटाया गया था, वहां फिर से बांस गाड़कर, टीन और एल्वेस्टर लगाकर अस्थायी ढांचे खड़े किए जाने लगे हैं। कुछ जगहों पर तो दुकानें भी दोबारा सजती दिखाई दे रही हैं। ऐसे में लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या प्रशासन की सख्ती सिर्फ कुछ दिनों की थी? अगर अभियान स्थायी समाधान के लिए था तो हटाए गए कब्जे दोबारा कैसे खड़े हो रहे हैं?
क्या निगरानी की कोई व्यवस्था नहीं है, या फिर नियमों का डर खत्म हो चुका है?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर परिषद क्षेत्र के कई अन्य इलाकों में भी नाले और सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण अब भी जस का तस है।अगर कार्रवाई निष्पक्ष और समान होनी थी तो अन्य मोहल्लों में बुलडोजर क्यों नहीं पहुंचा? क्या किसी विशेष इलाके को ही चिन्हित कर कार्रवाई की गई? या फिर संसाधनों और इच्छाशक्ति की कमी के कारण अभियान अधूरा छोड़ दिया गया?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सिस्टम बेबस हो गया है, या फिर रणनीति में ही कमी रह गई? प्रशासन की ओर से अब तक कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है, जिससे असमंजस की स्थिति बनी हुई है। जनता यह जानना चाहती है कि आगे की योजना क्या है—क्या दोबारा व्यापक स्तर पर अभियान चलेगा, क्या पुनः अतिक्रमण करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी, और क्या पूरे नगर परिषद क्षेत्र का सर्वे कर पारदर्शी सूची जारी की जाएगी?
गोगरी की जनता अब सिर्फ आश्वासन नहीं, ठोस कदम देखना चाहती है। सवाल सीधा है—क्या अतिक्रमण हटाओ अभियान स्थायी व्यवस्था बन पाएगा या फिर कुछ दिनों की सुर्खियों के बाद फाइलों में सिमट जाएगा? आने वाले दिनों में प्रशासन का रुख ही तय करेगा कि अभियान ठंडा रहेगा या फिर कब्जों पर दोबारा सख्त प्रहार होगा।

एसडीएफ न्यूज़ ब्यूरो, खगड़िया













