एसडीएफ न्यूज ब्यूरो, खगड़िया
गंगा के लगातार बढ़ते कटाव ने खगड़िया जिले के रहीमपुर दक्षिणी पंचायत में हालात भयावह कर दिए हैं। खेत, घर और भविष्य सब कुछ दांव पर लगा देख आज हजारों ग्रामीण सड़कों पर नहीं, बल्कि आस्था के मार्ग पर उतर आए। माथार नाव घाट पर गंगा पूजन और एकदिवसीय उपवास के जरिए लोगों ने अपनी वेदना और चेतावनी दोनों को एक साथ प्रकट किया।
सुबह होते ही घाट पर महिलाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। किसी की आंखों में आंसू थे, तो किसी के हाथ जुड़े हुए थे। गंगा माता से एक ही गुहार—“अब बस कीजिए, हमारे आशियाने को बख्श दीजिए।”
यह सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि टूटते सपनों की पुकार थी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व सरपंच शिवनंदन यादव ने की और मंच संचालन कृष्णानंद यादव ने किया।सभा में मौजूद हर शख्स के स्वर में गूंज रही थी एक ही मांग—दियारा क्षेत्र को बचाने के लिए तत्काल 14 किलोमीटर लंबा बंडाल (तटबंध) का निर्माण कराया जाए, वरना विनाश तय है।
सभा को संबोधित करते हुए ई. धर्मेंद्र कुमार ने दो टूक कहा—“अब इंतजार की सीमा खत्म हो चुकी है। अगर सरकार ने जल्द कदम नहीं उठाया, तो यह शांत आंदोलन एक बड़े जनआंदोलन में बदल जाएगा।”
वहीं युवा शक्ति के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नागेंद्र सिंह त्यागी ने कहा—“हमारी लड़ाई अहिंसक है, लेकिन कमजोर नहीं।
जब तक स्थायी समाधान नहीं मिलेगा, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।”
इस दौरान विभिन्न पंचायतों और संगठनों से आए हजारों लोगों ने गंगा माता को साक्षी मानकर शपथ ली कि वे इस लड़ाई को हर हाल में अंजाम तक पहुंचाएंगे।आंदोलन में भाग लेने वालों में जनार्दन यादव,राजद जिला अध्यक्ष मनोहर यादव,जदयू नेता सुमित कुमार चौधरी, सुभाष चंद्र जोशी,संजय यादव पैक्स अध्यक्ष रहीमपुर,उमेश प्रसाद सिंह,ललित चौधरी, पांडव यादव, पूर्व मुखिया टीकारामपुर मक्खन साह, योगेंद्र प्रसाद यादव, युवा शक्ति प्रदेश उपाध्यक्ष आशुतोष यादव, बबलू यादव,उमेश यादव,सरजू यादव, नागो यादव, सूर्यनारायण यादव, अधिवक्ता गोपाल मंडल, शंकर यादव, पंचायत समिति सदस्य देवन यादव, सिंटू पासवान, जनार्दन यादव, प्रफुलचंद्र घोष, पांडव यादव पूर्व मुखिया टीकारामपुर,अरविंद यादव,साहब यादव,शशि पासवान,उदय यादव, प्रमोद यादव सहित हजारों ग्रामीणों ने भाग लिया। गंगा कटाव आंदोलन का समर्थन करते हुए सभी नेताओं ने गंगा मां को साक्षी मानकर संकल्प लिया कि इस आंदोलन को तन मन और धन से साथ देंगे। तब तक लड़ाई लड़ते रहेंगे जब तक सरकार द्वारा कटाव का स्थाई समाधान नहीं होता है।















