राजेश सिन्हा
खगड़िया के राजेंद्र नगर में कई माह से फर्जी तरीके से करोड़ों रुपये की बेशकीमती जमीन की खरीद-बिक्री का सामने आता रहा मामला केवल जमीन की अवैध खरीद-बिक्री का नहीं है,बल्कि यह सरकारी तंत्र,भू-माफिया और शातिर बिचौलियों की मिलीभगत से रचा गया एक सुनियोजित और संगठित आर्थिक अपराध है।इस महाघोटाले के जरिए आम जनता की गाढ़ी कमाई के लगभग 35 से 40 करोड़ रुपये हड़प लिए गए हैं।
इस पूरे काले खेल की शुरुआत जमीन की वैधता के मुख्य प्रमाण ‘रजिस्टर 2’ को जानबूझकर गायब या चोरी करवाने से होती है,ताकि कागजात में मनमर्जी का हेरफेर किए जा सके।इस घोटाले का मुख्य केंद्र खाता नंबर 134, खेसरा नंबर- 447/1624 है,जिसका कोई भी वैध या स्पष्ट रिकॉर्ड सरकारी अभिलेखों में मौजूद नहीं है।
खुद राजस्व पदाधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में इसे संदिग्ध मानते हुए स्थलीय जांच की बात कही थी,लेकिन अंचल कार्यालय की मिलीभगत से इस अवैध नामांतरण (Mutation) को हरी झंडी दे दी गई।इस खेल में माफियाओं ने एक बेहद छोटे भूखंड को आधार बनाकर उसे 6 धुर,8 धुर और 10 धुर जैसे कई छोटे टुकड़ों में बांटा और एक ही जमीन को बार-बार अलग- अलग खरीदारों को 65 से 70 लाख रुपये प्रति कट्ठा के हिसाब से बेचकर करोड़ों रुपये वसूल लिए।इसमें खरीदारों का सीधा संपर्क असली विक्रेता से न कराकर पूरी डील बिचौलियों के जरिए की गई और पैसे इनके हाथों में देकर लोगों को सिर्फ भरोसे के नाम पर फर्जी कागजात थमा दिए गए।बिचौलियों का प्रभाव इतना अधिक है कि,संबंधित पदाधिकारी और कर्मचारी भी कुछ कहने से पहले झेंप जाते हैं और फिर ये कहकर चुप हो जाते हैं कि,गेहूं के साथ घुन भी कभी-कभी पीसा जाता है।
स्थिति का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि,जब इस अवैध रजिस्ट्री पर सवाल उठे,तो रजिस्ट्रार ने एक ऐसा गैर-जिम्मेदाराना बयान दिया,जिसे जानकर कोई भी ‘जिम्मेदार’अपने क्रोध को नहीं रोक पाएंगे।
अवर निबंधन पदाधिकारी ने कहा कि,वह एक ऐसे सरकारी दुकानदार हैं,जिनका काम सिर्फ राजस्व लेना है जमीन सही है या गलत,इससे उन्हें कोई मतलब नहीं है।जांच में यह भी सामने आया है कि इन भू- माफियाओं ने इसी सटीक कार्यप्रणाली का इस्तेमाल कर कई अन्य जमीनों पर भी ऐसा ही खेल खेला है।जिन इलाकों में जमीन का सरकारी सर्किलवरेट बहुत कम है,वहां फर्जी पहचान पत्रों (जाली पहचान दस्तावेज)के सहारे जमीनों को सर्किल रेट से 5 से 7 गुना अधिक कीमतों पर बेचा गया और इन माफियाओं ने करोड़ों की अवैध बेनामी संपत्ति अर्जित कर ली। जमीन मामलों को करीब से समझने वालों का स्पष्ट कहना है कि,इस खौफनाक खेल को रोकने के लिए सबसे पहले तथाकथित जमींदार सुरेंद्र मोहन प्रसाद वर्मा,इस खेल को अमलीजामा पहनाकर फर्जीवाड़ा करने वाले और इसमें शामिल सभी बिचौलियों व भू-माफियाओं की संपत्तियों की आर्थिक अपराध इकाई से गहन जांच होनी चाहिए।
कानून के शिकंजे में कसते ही जैसे ही इन मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी होगी,वैसे ही अंचल कार्यालय और निबंधन विभाग के उन सफेदपोश चेहरों और भ्रष्ट अधिकारियों का पर्दाफाश भी पूरी तरह सार्वजनिक हो जाएगा, जिन्होंने मोटी मलाई खाकर ‘रजिस्टर 2’ को गायब करवाया और इस महालूट का रास्ता साफ किया।आक्रोशित लोगों का कहना है कि,इन सभी पर धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश का मुकदमा दर्ज कर तुरंत जेल भेजा जाए,इनकी संपत्ति कुर्क की जाए और पीड़ितों का एक-एक पैसा वापस दिलाया जाए।ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि आगे-आगे होता है क्या?















