एसडीएफ न्यूज ब्यूरो,खगड़िया
करीब साढ़े सात महीने जेल की सलाखों के पीछे बिताने के बाद पत्रकार अभिजीत सिन्हा 25 मार्च को जमानत पर रिहा हुए।रिहाई के बाद उन्होंने मीडिया के सामने अपनी आपबीती साझा की और जिले के प्रशासनिक तंत्र,पुलिस और कथित माफिया-सियासी गठजोड़ पर गंभीर आरोप लगाए।
अभिजीत ने कहा कि उन्हें चित्रगुप्त नगर थाना कांड संख्या 86/2025 में जानबूझकर फंसाया गया।इस साजिश में जिले के भू-माफिया,शराब माफिया और राजनीतिक रसूखदारों की अहम भूमिका रही।उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके और उनके परिवार की कोई बात नहीं सुनी और उन्हें बेगुनाह होने के बावजूद जेल में डाल दिया।
अभिजीत ने बताया कि उनके परिवार के साथ जो सलूक हुआ वह “जंगलराज” जैसा था। अभिजीत ने बताया कि जेल में रहने के कारण उनकी बीमार मां का इलाज संभव नहीं हो सका और 24 नवंबर 2025 को उनकी मां का निधन हो गया।अभिजीत ने भावुक होकर कहा, “मां का ममता भरा आंचल मुझसे और मेरे परिवार से छीन लिया गया।अगर मुझे फंसाया नहीं गया होता,तो मां का इलाज संभव था और उनकी जान बच सकती थी।मेरे परिवार के खिलाफ रची गई इस साजिश ने मेरी मां को सदमे में डाल दिया।”
अभिजीत ने बताया कि जेल में रहने के दौरान उनके भाई और परिवार ने भी मानसिक और भावनात्मक अत्याचार झेला। उनका कहना है कि पुलिस ने परिवार की एक बात भी नहीं सुनी और पूरे मामले में उनकी बेगुनाही को नजरअंदाज किया गया।अभिजीत ने कहा कि जिस तरह उन्हें और उनके दो अन्य भाइयों को फंसाया गया,उसमें जिले का बहुत बड़ा भू-माफिया और शराब माफिया नेटवर्क सक्रिय था।उन्होंने स्पष्ट किया कि जेल से रची गई यह साजिश राजनीतिक रसूखदारों के इशारों पर अंजाम दी गई।अभिजीत ने आरोप लगाया कि पुलिस ने जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति की।अगर जांच सही दिशा में होती,तो घटना का मास्टरमाइंड पकड़ा जा सकता था।उनका कहना है कि असली हत्यारा अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।अभिजीत ने मीडिया के सामने यह भी कहा कि जिस घटना के तहत उन्हें फंसाया गया,अगर सच्चाई सामने आती है,तो वे पूरी तरह जांच में सहयोग करेंगे।उन्होंने कहा,मैं चाहता हूं कि मृतक और पीड़ित परिवार को न्याय मिले।अगर उन्हें न्याय की जरूरत है, तो मैं हर संभव मदद करूंगा।मेरा मकसद सिर्फ न्याय दिलाना है और सच को सामने लाना है।सत्य परेशान जरूर हो सकता है,लेकिन पराजित नहीं होगा।मैं आखिरी दम तक सच की लड़ाई लड़ूंगा।मुझे भरोसा है कि न्याय के मंदिर से मैं बेदाग निकलूंगा और पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा।उन्होंने बताया कि उनकी इस लड़ाई का उद्देश्य केवल खुद का नहीं बल्कि उन सभी लोगों के लिए है,जिनके साथ झूठे आरोप और साजिश के तहत अन्याय हुआ।
अभिजीत ने स्पष्ट किया कि उनका पूरा सहयोग न्यायपालिका और पुलिस जांच में रहेगा।उनका कहना है कि यदि निष्पक्ष और गहन जांच की जाती है,तो सच्चाई सामने आएगी और वास्तविक अपराधियों को दंडित किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों की जिंदगी इस साजिश के कारण प्रभावित हुई है,उनके लिए न्याय सुनिश्चित करना उनका प्राथमिक कर्तव्य है।मेरा संदेश स्पष्ट है कि,सच्चाई सामने आएगी और न्याय जरूर मिलेगा!!


अभिजीत ने बताया कि जेल में रहने के दौरान उनके भाई और परिवार ने भी मानसिक और भावनात्मक अत्याचार झेला। उनका कहना है कि पुलिस ने परिवार की एक बात भी नहीं सुनी और पूरे मामले में उनकी बेगुनाही को नजरअंदाज किया गया।अभिजीत ने कहा कि जिस तरह उन्हें और उनके दो अन्य भाइयों को फंसाया गया,उसमें जिले का बहुत बड़ा भू-माफिया और शराब माफिया नेटवर्क सक्रिय था।उन्होंने स्पष्ट किया कि जेल से रची गई यह साजिश राजनीतिक रसूखदारों के इशारों पर अंजाम दी गई।अभिजीत ने आरोप लगाया कि पुलिस ने जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति की।अगर जांच सही दिशा में होती,तो घटना का मास्टरमाइंड पकड़ा जा सकता था।उनका कहना है कि असली हत्यारा अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।अभिजीत ने मीडिया के सामने यह भी कहा कि जिस घटना के तहत उन्हें फंसाया गया,अगर सच्चाई सामने आती है,तो वे पूरी तरह जांच में सहयोग करेंगे।उन्होंने कहा,मैं चाहता हूं कि मृतक और पीड़ित परिवार को न्याय मिले।अगर उन्हें न्याय की जरूरत है, तो मैं हर संभव मदद करूंगा।मेरा मकसद सिर्फ न्याय दिलाना है और सच को सामने लाना है।सत्य परेशान जरूर हो सकता है,लेकिन पराजित नहीं होगा।मैं आखिरी दम तक सच की लड़ाई लड़ूंगा।मुझे भरोसा है कि न्याय के मंदिर से मैं बेदाग निकलूंगा और पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा।उन्होंने बताया कि उनकी इस लड़ाई का उद्देश्य केवल खुद का नहीं बल्कि उन सभी लोगों के लिए है,जिनके साथ झूठे आरोप और साजिश के तहत अन्याय हुआ।












