एसडीएफ न्यूज ब्यूरो,खगड़िया
खगड़िया नगर परिषद के अंदर उठा राजनीतिक बवंडर अब रंग दिखाने लगा है।सशक्त स्थायी समिति के पांच सदस्यों द्वारा बैठक का बहिष्कार करने के बाद मामला काफी गरमा गया है।स्थिति का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि, नगर परिषद खगड़िया की सशक्त स्थायी समिति की बैठक में उत्पन्न गतिरोध अब राज्य स्तर तक पहुंच गया है।नगर सभापति अर्चना कुमारी ने बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव को विस्तृत पत्र भेजकर समिति के कुछ सदस्यों के आचरण,बैठक की कार्यवाही में कथित बाधा उत्पन्न करने तथा जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण एजेंडों की उपेक्षा किए जाने की शिकायत की है।उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
नगर सभापति द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि 12 जून 2026 को आयोजित सशक्त स्थायी समिति की बैठक में नगर क्षेत्र के विकास,शहर के सौंदर्यीकरण,पैदल यात्रियों की सुविधा के लिए फुटपाथ एवं पेवर ब्लॉक निर्माण,पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से वृक्षारोपण अभियान तथा अन्य विकास कार्यों से जुड़े महत्वपूर्ण एजेंडे निर्धारित किए गए थे।लेकिन बैठक शुरू होने के बाद कुछ सदस्यों द्वारा निर्धारित एजेंडों पर चर्चा करने के बजाय बैठक की कार्यवाही को प्रभावित करने का प्रयास किया गया।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि निर्धारित समय पर बैठक शुरू होने के बाद कुछ सदस्य बैठक कक्ष से बाहर आते-जाते रहे तथा एजेंडों पर चर्चा करने के प्रति गंभीरता नहीं दिखाई।नगर सभापति ने आरोप लगाया कि बार-बार आग्रह करने के बावजूद विकास कार्यों एवं जनहित के प्रस्तावों पर चर्चा नहीं होने दी गई और बैठक का वातावरण प्रभावित किया गया।
पत्र में यह भी कहा गया है कि सशक्त स्थायी समिति नगर परिषद की एक महत्वपूर्ण निर्णयकारी समिति है,जिसके माध्यम से नगर विकास, नागरिक सुविधाओं एवं जनहित से जुड़े विषयों पर निर्णय लिए जाते हैं।ऐसे में यदि समिति की बैठकों में निर्धारित एजेंडों के बजाय अन्य विषयों को प्राथमिकता दी जाएगी तो इससे नगर परिषद की कार्यप्रणाली प्रभावित होगी और जनता के विकास कार्य बाधित होंगे।
नगर सभापति अर्चना कुमारी ने अपने पत्र में बिहार नगरपालिका अधिनियम,2007 का उल्लेख करते हुए कहा है कि समिति की बैठकों का संचालन निर्धारित नियमों एवं प्रक्रियाओं के अनुसार होना चाहिए।उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों का दायित्व है कि वे व्यक्तिगत अथवा गैर- प्रासंगिक विषयों के बजाय जनहित एवं विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करें और नगर परिषद के सुचारु संचालन में सहयोग दें।
उन्होंने प्रधान सचिव से अनुरोध किया है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराई जाए तथा संबंधित सदस्यों के आचरण की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं,ताकि भविष्य में सशक्त स्थायी समिति की बैठकों का संचालन नियमसम्मत, पारदर्शी और जनहित के अनुरूप सुनिश्चित किया जा सके।
नगर सभापति ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि नगर परिषद की बैठकों में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों से अपेक्षा रहती है कि वे नगर के विकास, स्वच्छता,सौंदर्यीकरण,पर्यावर संरक्षण और नागरिक सुविधाओं के विस्तार से जुड़े विषयों पर गंभीरतापूर्वक विचार करें।यदि विकास से जुड़े एजेंडों को लगातार प्रभावित किया जाएगा तो इसका सीधा असर नगर के विकास कार्यों पर पड़ेगा।
पत्र की प्रतिलिपि माननीय मंत्री, नगर विकास एवं आवास विभाग,बिहार सरकार तथा माननीय मुख्यमंत्री,बिहार सरकार को भी भेजी गई है।
नगर परिषद के सूत्रों के अनुसार इस घटनाक्रम के बाद नगर परिषद की कार्यप्रणाली और सशक्त स्थायी समिति की बैठकों को लेकर राजनीतिक एवं प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य सरकार और नगर विकास विभाग इस मामले में क्या रुख अपनाता है तथा भविष्य में नगर परिषद की बैठकों के संचालन को लेकर क्या दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं?

एसडीएफ न्यूज ब्यूरो,खगड़िया













